shri ganesh bhagwan

भगवान के रूप, लीला और गुणों की भांति ही उनके नाम भी अप्राकृत, अलौकिक और चिदानन्दमय होते हैं । उनमें असीम शक्ति होती है । इसीलिए नाम-स्मरण के प्रभाव से सुख, सम्पत्ति, ऐश्वर्य, मोक्ष और भगवत्प्रेम की प्राप्ति संभव है । जैसे मन क्षण मात्र में अनन्त कोस दूर पहुंच जाता है, वैसे ही देवता जोकि मन्त्ररूप होते हैं, निरन्तर नाम-स्मरण से साधक के सम्मुख उपस्थित हो जाते हैं । इसीलिए संतों ने मनुष्य के कल्याण के लिए नाम-जप की साधना प्रचलित की है ।

प्राय: हम दैनिक जीवन में किसी-न-किसी रूप में कार्यों में विघ्न व अड़चनों का सामना करते हैं । हमारा जीवन विघ्न-बाधा रहित हो तथा हमें चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति सुगमता से हो—इसके लिए हमें श्रीगणेश की शरण लेनी चाहिए । छोटे-बड़े सभी कार्यों के आरम्भ में या नित्य ही यदि श्रीगणेश के हजार नामों के समान फल देने वाले 21 नामों का स्मरण कर लिया जाए तो जीवन सुख-शान्ति व बगैर किसी बाधा के व्यतीत होने लगता है । लोक-परलोक में सभी जगह सफलता पाने का यही एकमात्र छोटा-सा उपाय है । श्रीगणेश अपनी इस संक्षिप्त अर्चना से ही संतुष्ट होकर व्यक्ति को ऋद्धि-सिद्धि से परिपूर्ण कर देते हैं और विद्या, सुख, धन व भक्ति का वरदान देने के कारण ही वे वरदमूर्ति कहलाते हैं । 

गणेशपुराण के उपासना खण्ड में भगवान महागणपति ने अपने हजार नामों के समान फल देने वाले 21 नामों का वर्णन किया है—

हजार नामों के समान फल देने वाले श्रीगणेश के 21 नाम

  1. गणंजय
  2. गणपति
  3. हेरम्ब
  4. धरणीधर
  5. महागणपति
  6. लक्षप्रद
  7. क्षिप्रप्रसादन
  8. अमोघसिद्धि
  9. अमित
  10. मन्त्र
  11. चिन्तामणि
  12. निधि
  13. सुमंगल
  14. बीज
  15. आशापूरक
  16. वरद
  17. शिव
  18. काश्यप
  19. नन्दन
  20. वाचासिद्ध
  21. ढुण्ढिविनायक

गणेशस्यैकविंशति नाम स्तोत्र (श्रीगणेश का 21 नाम स्तोत्र संस्कृत में)

ॐ गणंजयो गणपतिर्हेरम्बो धरणीधर: ।
महागणपतिर्लक्षप्रद्र: क्षिप्रप्रसादन: ।। १ ।।
अमोघसिद्धिरमितो मन्त्रश्चिन्तामणिर्निधि: ।
सुमंगलो बीजमाशापूरको वरद: शिव: ।। २ ।।
काश्यपो नन्दनो वाचासिद्धो ढुण्ढिविनायक: ।

भगवान श्रीगणेश को ये 21 नाम मोदक के समान हैं प्रिय

मोदकैरेभिरत्रैकविंशत्या नामभि: पुमान् ।। ३ ।।
(उपायनं ददेद्भक्त्या मत्प्रसादं चिकीर्षति ।
वत्सरं विघ्नराजस्य तथ्यमिष्टार्थसिद्धये ।।)
य: स्तौतिमद्गतमना मदाराधनतत्पर: ।
स्तुतो नाम्नां सहस्त्रेण तेनाहं नात्र संशय ।। ४ ।।

स्वयं श्रीगणेश का कथन है—जो व्यक्ति इन मोदक रूपी 21 नामों द्वारा मुझे भक्तिपूर्वक उपहार अर्पित करता है; मेरा प्रसाद चाहता है और मनोकामना पूर्ति के लिए एक वर्ष तक मुझ विघ्नराज के इस स्तोत्र का पाठ करता है, मुझमें मन लगाकर, मेरी आराधना में तत्पर रहकर मेरा स्तवन करता है, इन 21 नामों को पढ़ने से ही मेरी सहस्त्रनाम से स्तुति हो जाती है, इसमें कोई संशय नहीं है ।

नमो नम: सुरवरपूजितांघ्रये
नमो नमो निरुपममंगलात्मने
नमो नमो विपुलपदैकसिद्धये
नमो नम: करिकलभाननाय ।। ५ ।।

श्रेष्ठ देवताओं द्वारा पूजित चरण वाले गणेश को नमस्कार है, नमस्कार है । अनुपम मंगलस्वरूप गणपति को बारम्बार नमस्कार है । एकमात्र जिनसे विपुल पद परमधाम की सिद्धि होती है, उन गणाधीश को बारम्बार नमस्कार है ।

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