krishna janam nandotsav with nand baba

भारतीय संस्कृति में जन्म को उत्सव के रूप में लिया गया है; फिर भगवान का जन्म तो अत्यन्त दिव्य है । स्वयं भगवान ने श्रीमद्गीता में कहा है—‘जन्म कर्म च मे दिव्यम् ।’ इसीलिए इसे श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव कहा गया है ।

श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के दूसरे दिन को ‘नन्दोत्सव’ कहा गया है । जिसे व्रज में ‘दधिकांदो’ के रूप में मनाया जाता है । यह उत्सव परम आनन्ददायक होता है । इस दिन भगवान पर कपूर, हल्दी, दही, घी, तेल, जल और केसर मिला कर चढ़ाते हैं और फिर इसे ‘भगवान की छी-छी’ कहकर भक्तगण आपस में एक दूसरे पर छिड़कते हैं । 

जन्माष्टमी और नंदोत्सव के दिन श्रीकृष्ण-जन्म की बधाइयां गायी जाती हैं । भगवान के जन्म महोत्सव पर बधाइयां गाना भगवान की सेवा ही है; अत: यह भक्ति का ही एक अंग है । इससे भक्त और भगवान दोनों को ही आनंद प्राप्त होता है । बधाइयां गाना भगवान की कीर्तन सेवा है जिसमें भगवान के प्राकट्य पर व्रजवासियों के आनंद का गायन किया जाता है । यहां जन्माष्टमी व नन्दोत्सव में गाये जाने वाले बधाइयों के पद दिए जा रहे हैं —

🌹अनौखौ जायौ ललना मैं वेदन में सुनि आई ।
मैं वेदन में सुनि आई, पुरानन में सुनि आई ।
मथुरा में याने जनम लियो है, गोकुल में झूल्यौ पलना ।
ले वसुदेव चले गोकुल कूँ याके चरन परस गई यमुना ।
काहे कौ याकौ बन्यौ है पालनौ, काहे के लागे फुन्दना ।
रत्नजटित कौ बन्यौ है पालनौ, रेशम के लागे फुन्दना ।
चन्द्रसखी भज बालकृष्ण छवि, चिरजीवौ यह ललना ।।

🌹सब मिलि मंगल गावो माई ।
आज लाल को जन्मदिवस है बाजत रंग बधाई ।।
आंगन लीपो चौक पुरावो विप्र पढन लागे वेद ।
करो सिंगार श्यामसुन्दर को चोवा चंदन मेद ।।
आनंद भरी नंदजू की रानी फूलो अंग न समाई ।
परमानंददास तिहिं  ओसर बहुत न्योछावर पाई ।।

🌹फूले अति बेठे हैं व्रजराज ।
ठाडे कहत सकल ब्रजवासी जन्म सुफल भयो आज ।।
देख देख मुख कमलनेन को आनंद उर न समाय ।
फिर फिर देत बुलाय बधाई मगन भये नंदराय ।।
डोलत फिरत नंद गृह अति आनंद भरे ।
श्रीविट्ठल गिरिधर के देखत मन में हरख करे ।।

🌹आज व्रज भयो सकल आनंद ।
नंद महर घर ढोटा जायो पूरन परमानंद ।
मंगल कलश विराजत द्वारे गावत गीत आनंद ।
नाचत तरुनी और गोप सब प्रगटे गोकुलचंद ।
विविध भांति बाजे बाजत हैं निगम पढत द्विज छंद ।
छिरकत दूध दही घृत माखन प्रफुलित मुख अरविंद ।।
देत दान व्रजराज मगन मन फूले अंग न माइ ।
देत असीस जियो जसुमति सुत गोविंद बलि बलि जाइ ।।

*व्रज में ढोटा पुत्र को कहते हैं ।

🌹आज नंदजू रे द्वारे भीर ।
गावत मंगल गीत सब मिल प्रगटे हैं बलवीर ।।
एक आवत एक जात ह्वे एक ठाडे मंदिर के तीर ।
एकन कुं गउदान देत हैं एकन कुं पहनावत चीर ।।
एकन कुं फूलमाल देत हैं एकन कुं घिस चंदन नीर ।
सूरदास तब नवनिधि पाइ धन्य यसोदा पुण्य शरीर ।।

🌹सब मिल ग्वालन देत असीस ।
नंदराय नंदरानी ढोटा चिर जियो कोटि बरीस ।।
धन्य यह कूंख (कोख) भइ सुभ लच्छन जिहि सगरो ब्रज जायो ।
ऐसो पुत्र जायो नंदरानी जिन कर अटल बसायो ।।
बेगि बढो तुम्हारो गृह आंगन ठुम ठुम खेलत डोले ।
श्रीविट्ठल गिरिधरन रानी सों मैया कहि कहि बोले ।।

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