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भगवान शिव और पार्वती के परिहास में छिपा जगत का कल्याण

’पार्वती! तुम अपने पिता हिमाचल की तरह पत्थर-दिल प्रतीत होती हो। तुम्हारी चाल में भी पहाड़ी मार्गों की तरह कुटिलता है। ये सब गुण तुम्हारे शरीर में हिमाचल से ही आए प्रतीत होते हैं।’ शिवजी के इन वचनों ने पार्वतीजी की क्रोधाग्नि में घी का काम किया। उनके होंठ फड़कने लगे, शरीर कांपने लगा।

भगवान शंकर, शुक्राचार्य और मृतसंजीवनी विद्या

दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य, भृगुपुत्र कवि का शुक्राचार्य नाम क्यों पड़ा?, शुक्राचार्य द्वारा कहे गए भगवान शंकर के १०८ नाम, भगवान शंकर द्वारा शुक्राचार्य को मृतसंजीवनी विद्या देना, शुक्रेश्वर शिवलिंग